उत्तराखंड में नालों-खालों में अवैध अतिक्रमण पर चलेगा डंडा, इन बिल्डिंग के सुरक्षा मानकों की होगी जांच

उत्तराखंड में हर साल मानसून सीजन के दौरान भारी बारिश के चलते सबसे ज्यादा नुकसान नदी, नालों और खालों के पास बने आवासों को होता है. ऐसे में अब उत्तराखंड सरकार ने निर्णय लिया है कि मानसून सीजन के दौरान बनने वाले आपदा जैसे हालातों के चलते नदियों, नालों और खालों के समीप बने आवासों को नुकसान न हो, इसके लिए अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही प्रदेश में निर्माणाधीन या फिर संचालित हो रहे बड़े-बड़े व्यावसायिक भवनों के सुरक्षा मानकों की जांच का भी निर्णय लिया है.
दरअसल, उत्तराखंड में 21 जून के आसपास मानसून दस्तक तक देने जा रहा है. मानसून के दौरान प्रदेश में हर साल भीषण आपदा का दंश झेलना पड़ता है. जिससे चलते जानमाल को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचता है. खासकर नदियों, नालों और खालों के पास बने भवनों को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचता है. जबकि, यह सभी भवन अवैध अतिक्रमण कर बनाए गए होते हैं.
ऐसे में राज्य सरकार ने अधिकारियों को दिए निर्देश दिए गए हैं कि नदी, नालों और खालों के समीप अतिक्रमण न होने दिया जाए और अगर कहीं अतिक्रमण है, तो उसे हटाया जाए. ताकि, मानसून सीजन के दौरान नदियों का जलस्तर बनने से जान माल के नुकसान को कम किया जा सके.
वहीं, एमडीडीए के उपाध्यक्ष एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने कहा कि आगामी मानसून सीजन को देखते हुए दो तरह की कार्रवाई की जा रही है. पिछले साल की आपदा के दौरान नालों और खालों में जहां भी अवैध अतिक्रमण था और भारी बारिश की वजह से जिन जगहों पर नुकसान हुआ है, उस पर सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों से कहा गया है कि जल स्रोतों के आसपास अवैध निर्माण न करने दिया जाए.
अगर कहीं अवैध निर्माण है, तो उसे हटाया जाए. इसके साथ ही अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. इतना ही नहीं जो व्यावसायिक निर्माण बड़े स्तर पर हो रहे हैं, उनके जांच के साथ ही व्यावसायिक भवनों में संचालित लिफ्ट, फायर सेफ्टी, सीसीटीवी की स्थिति की जांच के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं. साथ ही कहा कि अवैध प्लॉटिंग, अवैध अतिक्रमण पर लगाम लगाए जाने को लेकर नई तकनीकी के जरिए क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग भी कराई जा रही है.




