उत्तराखंड

मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में जोरों पर जमीन की खरीद फरोख्त, रोक लगाने के लिए सीएम से करेंगे वार्ता

प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए सरकार ने सख्त भू-कानून लागू किया है. इसके बाद भी बाहरी लोग जमीन की खरीद फरोख्त कर रहे हैं. वहीं ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) के मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में जमीनों के खरीद फरोख्त का मामला सामने आने के बाद चर्चाओं में बना है. जो आने वाले दिनों में चिंता का सबब बन सकता है. वहीं मुख्यमंत्री द्वारा प्रोत्साहित युवा ग्राम प्रधान प्रियंका नेगी ने कहा कि कुछ ग्रामीणों द्वारा जमीनें बेचे जाने की जानकारी मिली है, जो ग्रामीण क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है. बताया कि मामले में जब कुछ भूमि विक्रेताओं से बातचीत की गयी तो जमीन खरीदार द्वारा जमीन के उपयोग ओर उससे ग्रामीणों को मिलने वाले लाभ की जानकारी नहीं दी गयी है.

प्रियंका नेगी ने कहा कि हम लोग जमीनें ही बेच देंगे तो योजनाएं किस काम की रह जाएंगी. उन्होंने कहा कि मामले में जल्द ही ग्राम पंचायत की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा. जिसमें पूर्व की भांति ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र से जुड़े गांवों में भूमि की बिक्री को पूर्णतया प्रतिबंधित किए जाने की मांग की जाएगी.

पूर्व प्रधान सारकोट राजेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि राजधानी क्षेत्र में थोड़ा बहुत विकास की शुरुआत देखकर ही भूमाफियाओं की नजर यहां लगी हुई है,जो भोले भाले ग्रामीणों को झांसे में लेकर सस्ते दामों पर जमीन खरीद का नेटवर्क चला रहे हैं. उन्होंने मामले की जांच की मांग करते हुए अविलंब खरीद फरोख्त पर रोक लगाने की मांग की है.

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण से सटे सारकोट गांव को मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम घोषित किया गया है, जबकि इससे सटे परवाडी गांव को भी आदर्श ग्राम बनाए जाने को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है. लगभग 3 वर्ष पूर्व घोषित मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में वर्तमान में तमाम विभागों की करोड़ों रुपयों की धनराशि की योजनाओं को धरातल पर उतारा गया है, जिसके तहत सारकोट गांव के सभी 250 भवनों पर सौंदर्यीकरण योजना के तहत रंग रोगन कर नया स्वरूप दिया गया है.

ग्रामीणों को कृषि उधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की मंशा से जिला प्रशासन द्वारा गांव के 203 कृषकों की लगभग 126 हेक्टेयर जमीन को बेहतर आय का साधन बनाने के लिए 1600 मीटर की सोलर चैन लिंक फेंसिंग तैयार की जा चुकी है, जबकि 950 मीटर और कार्य किया जाना प्रस्तावित है. वहीं,दूसरी ओर गांव के रास्तों को सोलर लाइटों से चमकाया गया है, प्राथमिक विद्यालय में तमाम निर्माण व सजावट कार्य संचालित हैं, गांव में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को 14 पेयजल टैंकों का भी निर्माण चल रहा है. जबकि महिलाओं को रोजगार से जोडने के लिए स्वंय सहायता समूह के माध्यम से लघु कुटीर उद्योग चलाने के लिए बैंक ऋण सहित मशीनें भी उपलब्ध करवायी गई हैं.

दूसरी तरफ सरकार द्वारा संचालित करोडों रूपये की योजनाओं में भविष्य की कोई बड़ी संभावना को नजर अंदाज कर ग्रामीण ताल्कालिक लाभ देख अपनी पुस्तैनी जमीनों को बेच रहे हैं. राजस्व रिकार्डों की बात करें तो विगत मई माह में ही 13 से 30 मई के बीच अब तक लगभग 50 नाली भूमि बेची जा चुकी है, जिसकी सरकारी दरों की लागत ही लगभग पौने दो करोड़ रुपए के आसपास बताई जा रही है,जबकि बाजार रिसेल वैल्यू की अनुमानित लागत 10 करोड़ से भी ऊपर बताई जा रही है.

मामले में जब भराड़ीसैंण क्षेत्र के राजस्व उप निरीक्षक विनोद कुमार से जानकारी लेनी चाही तो, उन्होंने 15 नाली तक ही भूमि बेचे जाने की जानकारी होने की बात कही, जो किसी के भी गले नहीं उतर रही है. जबकि बिक्री किए जाने वाली भूमि के नक्शे राजस्व उप निरीक्षक द्वारा ही तैयार किए जाते हैं. राजस्व रिकार्डों के आधार पर अब तक लगभग 50 नाली भूमि बेची जा चुकी है. बता दें कि पूर्व में हरीश रावत सरकार ने यहां भूमि बिक्री पर रोक लगाई थी.

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