गैरसैंण विधानसभा को वेडिंग-कॉर्पोरेट डेस्टिनेशन बनाने के सतपाल के बयान से उबाल, कांग्रेस ने सीएम से मांगा स्पष्टीकरण
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा था गैरसैंण विधानसभा भवन का उपयोग शादी बारात, वेडिंग/कॉर्पोरेट डेस्टिनेशन के रूप में किया जाना चाहिए

गैरसैंण: उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन को वेटिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किए जाने को लेकर बयान दिया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सदन के अंदर बयान न देकर बाहर बयान दिया गया है. इसके बाद कांग्रेस पार्टी पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के खिलाफ आक्रामक हो गई है. नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने भी नाराजगी जताते हुए सतपाल महाराज के बयान पर सीएम धामी से स्पष्टीकरण मांगा है.
विधानसभा भवन को लेकर सतपाल महाराज के बयान से कांग्रेस आक्रोशित: उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इसको लेकर सतपाल महाराज पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान गैरसैंण में राजधानी से निमित वहां जो निर्माण कार्य हुए, उन्हीं निर्माण कार्यों का उपयोग उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार भविष्य में पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग किया जाना चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर सृजन हो सकें. उन्होंने कहा कि राज्य के अनेक लोग गैरसेंण के भराड़ीसैंण मे स्थायी राजधानी के रूप में सपने देख रहे हैं, उन सभी के दिलों पर पर्यटन मंत्री के इस बयान ने ठेस पहुंचाई है.
महाराज के बयान पर सीएम दें स्पष्टीकरण: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि-
जब सदन चल रहा हो, तब सदन के अंदर उन्होंने बयान न देकर इस संबंध में बाहर बयान दिया. जबकि सदन की हमेशा परंपरा यही रही है कि मंत्रियों के नीतिगत बयान सदन के पटल पर आने चाहिए, जबकि उनकी तरफ से यह बयान बाहर दिया गया है. यह बयान पर्यटन मंत्री की तरफ से सिर्फ चर्चाओं को छेड़ने के लिए दिया गया है, या फिर इसके पीछे सरकार की कोई मंशा है, यह बात अभी साफ होनी बाकी है. सत्र में मुख्यमंत्री धामी को इस बात का स्पष्टीकरण देना चाहिए.
-गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष-
गोदियाल की विधायकों से अपील: गणेश गोदियाल ने कहा कि सदन में सभी पक्ष और विपक्ष के विधायकों को मांग उठानी चाहिए कि मुख्यमंत्री इस पर कुछ कहें, क्योंकि यह बयान उत्तराखंड की नीतिगत बात है और उत्तराखंड से जुड़ा हुआ विषय है. जब पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज कांग्रेस की सरकार के समय पर मंत्री थे, तब राजधानी के निमित्त निर्माण के लिए उनका भी साथ मिला था. भाजपा में जाने के बाद उनके विचार बदल गए हैं. हकीकत में किसी व्यक्ति के नीतिगत विचारों में फर्क आना नहीं बल्कि संगठन के विचारों का फर्क है. दरअसल सतपाल महाराज अब भाजपा के विचारों से ओतप्रोत हैं. तभी वह गैरसैंण विधानसभा भवन में पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ाये जाने की बात कर रहे हैं. गणेश गोदियाल का कहना है कि उत्तराखंड के लोग सतपाल महाराज के इन विचारों से बिल्कुल सहमत नहीं हैं.
क्या सरकार गुपचुप कोई नीति बना रही है- गोदियाल: उत्तराखंड से लगाव रखने वाले सभी पक्ष और विपक्ष के विधायकों को एक स्वर मे सदन के भीतर मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण लेना चाहिए कि क्या सरकार की गुपचुप नीति गैरसैंण को किसी के हाथों में सौंपने की साजिश रची जा रही रही है. उन्होंने मसूरी स्थित सर जॉर्ज एवरेस्ट का मामला उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपए की भूमि को छद्म कॉम्पिटीशन के आधार पर महज ओने पौने दामों पर एक संस्था को सौंप दिया गया. इस तरह सरकार उत्तराखंड की तमाम सरकारी संपत्तियों को नीलाम करने में लगी हुई है.
सतपाल के बयान को आर्या ने बताया अस्मिता का अपमान: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या भी सतपाल के विधानसभा के अन्य कार्यों में उपयोग को लेकर बयान से खासा नाराज हैं. नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने कहा कि-
गैरसैंण विधानसभा भवन को शादी-बारात और वेडिंग/कॉरपोरेट डेस्टिनेशन बनाने का सुझाव अत्यंत निंदनीय है. गैरसैंण केवल एक भवन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनता के संघर्ष, सपनों और राज्य आंदोलन की भावनाओं का प्रतीक है. जिस स्थान को लोकतंत्र के मंदिर के रूप में स्थापित किया गया, उसे शादी-बारात या कॉरपोरेट कार्यक्रमों के लिए उपयोग करने की बात करना राज्य की अस्मिता का अपमान है.
-यशपाल आर्या, नेता प्रतिपक्ष-
कांग्रेस ने सरकार से मांगा बयान: सरकार को इस विषय पर तत्काल स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह वास्तव में विधानसभा जैसे पवित्र संस्थान को पर्यटन और व्यावसायिक आयोजनों का स्थल बनाना चाहती है? उत्तराखंड की जनता इस विषय पर सरकार से स्पष्ट जवाब चाहती है.




