बदरीनाथ धाम में शीतकाल में 20 साधुओं ने मांगी तप की अनुमति, मान्यता है देवता स्वयं करते भगवान नारायण की पूजा
शीतकाल में भी बदरीनाथ महायोजना के कार्य गतिमान हैं।

गोपेश्वर: ‘स्कंद पुराण’ के केदारखंड में उल्लेख है कि कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ धाम में भगवान नारायण की पूजा देवता स्वयं करते हैं। देव प्रतिनिधि के रूप में देवर्षि नारद मुख्य पुजारी की भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा कपाट बंद रहने की अवधि में साधु-संत भी बदरीनाथ धाम की गुफाओं में तप करते हैं। इस बार भी 20 साधु-संतों ने बदरीनाथ धाम में तप करने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी है। पुलिस सत्यापन के बाद ज्योतिर्मठ तहसील प्रशासन उन्हें धाम में रहने की अनुमति देगा।
बदरीनाथ धाम की सुरक्षा के लिए शीतकाल में सुरक्षाकर्मी यहां तैनात रहते हैं। बर्फबारी के बाद धाम के लिए आवाजाही पूरी तरह बाधित हो जाती है। इसलिए साधु-संतों के लिए राशन व जरूरी दवाइयां पहले ही उपलब्ध करा दी जाती हैं।
वर्षों से शीतकाल के दौरान बदरीनाथ धाम में रह रहे अमृतानंद (बाबा बर्फानी) का कहना है कि शीतकाल में तप करने का आनंद ही कुछ और है। जब हाड़ कंपाती ठंड के बीच पंछी भी बदरीनाथ धाम से पलायन कर लेते हैं, तब एकांत में भगवान नारायण का नाम जपने को साधु-संत स्वयं को धन्य मानते हैं।
आइटीबीपी ने संभाला सुरक्षा का जिम्मा
शीतकाल में बदरीनाथ धाम की सुरक्षा का जिम्मा आइटीबीपी को सौंपा जाता है। पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि कपाट बंद होने के साथ आइटीबीपी की एक प्लाटून बदरीनाथ मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा संभाल चुकी है।
महायोजना का कार्य जारी
शीतकाल में भी बदरीनाथ महायोजना के कार्य गतिमान हैं। विभिन्न एजेंसियों के इंजीनियिर, कर्मचारी व श्रमिक बदरीनाथ धाम में मौजूद हैं। महायोजना का कार्य कर रही लोक निर्माण विभाग प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट के अधिशासी अभियंता योगेश मनराल ने बताया कि धाम में बर्फबारी होने तक मास्टर प्लान के कार्य जारी रखने की रणनीति बनाई गई है। वर्तमान में रिवर फ्रंट सहित अन्य कार्य हो रहे हैं।




