उत्तराखण्ड सचिवालय संघ चुनाव: दीपक जोशी चौथी बार अध्यक्ष, राजेंद्र रतूड़ी महासचिव बने

एक बार फिर दीपक जोशी उत्तराखण्ड सचिवालय संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत गए। राजेन्द्र रतूड़ी महासचिव पद पर विजयी रहे।
शुक्रवार देर शाम घोषित परिणामों में अध्यक्ष पद पर दीपक जोशी ने जीत दर्ज की, जबकि महासचिव पद पर राजेंद्र रतूड़ी विजयी रहे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सचिवालय परिसर में समर्थकों ने विजेताओं का फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया और खुशी जताई।
अध्यक्ष पद के मुकाबले में दीपक जोशी को 594 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी प्रदीप को 485 मत प्राप्त हुए। महासचिव पद पर राजेंद्र रतूड़ी ने 577 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी विमल जोशी को 498 मत मिले।
अध्यक्ष पद पर दीपक जोशी ने 594 मत हासिल किए जबकि उनके प्रतिद्वंदी प्रदीप पपनै ने 485 वोट हासिल किए।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष पर राकेश जोशी ने 579 वोट हासिल किए जबकि उनके प्रतिद्वंदी अभिनव भट्ट ने 496 मत हासिल किए। उपाध्यक्ष पद पर संजय कुमार शर्मा ने 506 वोटों के साथ जीत हासिल की। उनके प्रतिद्वंदी दिनेश उनियाल ने 339, जगत सिंह डसीला ने 228 वोट हासिल किए।
सचिवालय संघ में पहली बार महिला उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ। इस पद पर प्रमिला टम्टा ने 630 वोटों के साथ जीत दर्ज की जबकि उनकी प्रतिद्वंदी रेनू भट्ट ने 451 मत हासिल किए। महासचिव पद पर राजेंद्र रतूड़ी 577 मतों के साथ विजयी रहे जबकि उनके प्रतिद्वंदी विमल जोशी ने 498 मत हासिल किए। सचिव पद पर अतुल कुमार सिंह ने 498 मतों के साथ जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंदी पुष्कर सिंह नेगी को 395, अमित कुमार को 184 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद पर दिव्यांशु डोभाल 613 मतों के साथ विजेता रहे।
उनके प्रतिद्वंदी सुरेंद्र रावत को 474, रमेश चंद्र जोशी को 333, लालमणि जोशी को 309, भूपेंद्र जोशी को 173 वोट मिले। संप्रेक्षक पद पर रीना मखन्वाल ने 503 वोटो के साथ जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंदी गौरव प्रताप सिंह ने 290, विजेंद्र सिंह ने 281 मत हासिल किए। जीत के बाद सभी प्रत्याशियों ने देर रात तक सचिवालय परिसर में जश्न मनाया।
चौथी बार अध्यक्ष बने हैं दीपक जोशी
दीपक जोशी सचिवालय संघ के तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी पहचान सचिवालय के तेजतर्रार व संघर्षशील नेता के तौर पर रही है। सचिवालय कर्मचारियों की कई मांगों के लिए उनके आंदोलन याद किए जाते हैं। पिछले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब चौथी बार अध्यक्ष चुने गए हैं




