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पिथौरागढ़ पुलिस का बड़ा एक्शन, कॉन्स्टेबल शेर सिंह को किया बर्खास्त

विभागीय जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर शेर सिंह का आचरण गंभीर दुराचार की श्रेणी में पाया गया है.

पिथौरागढ़: पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान वर्दी पहनकर मंच से CJP के समर्थन में भाषण देने वाले पिथौरागढ़ में तैनात उत्तराखंड पुलिस के सस्पेंड कॉन्स्टेबल शेर सिंह पर एक्शन हुआ है. पिथौरागढ़ पुलिस ने कॉन्स्टेबल शेर सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. पिथौरागढ़ पुलिस ने इसे लेकर प्रेस नोट भी जारी किया है.

पिथौरागढ़ पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने विभागीय जांच के बाद उत्तराखंड पुलिस अधिनियम-2007 और राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली-2002 के उल्लंघन का दोषी माना है. जिसके बाद तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी के आदेश जारी किए हैं. पुलिस जवान शेर सिंह पिथौरागढ़ जिले में आरक्षी के पद पर तैनात था. पहले से निलंबित चल रहा था. हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में वह पुलिस की वर्दी पहनकर मंच पर पहुंचा. उसने CJP के समर्थन में भाषण देते हुए इस्तीफा देने की घोषणा की थी. इसके बाद मामला चर्चा में आया.विभाग ने उसके खिलाफ कार्रवाई तेज की.

कुमाऊं रेंज की आईजी निवेदिता कुकरेती ने वीडियो सामने आने के बाद जारी बयान में कहा था कि शेर सिंह 28 जून 2026 से पिथौरागढ़ से अनऑथराइज्ड रूप से अनुपस्थित था. एसपी पिथौरागढ़ ने उसे नोटिस जारी किया था, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया. आईजी ने कहा था कि छात्र आंदोलन में दिया गया उसका बयान ‘अनर्गल और उकसाने वाला’ है.

पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक कोंडे ने आदेश में कहा कि विभागीय जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर शेर सिंह का आचरण गंभीर दुराचार की श्रेणी में पाया गया. यह उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 तथा उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली, 2002 के प्रावधानों का उल्लंघन है. पुलिस संगठन की अनुशासनात्मक गरिमा और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए उसे सेवा से बर्खास्त किया गया है.

उत्तराखंड पुलिस ने कहा विभाग में अनुशासन, सत्यनिष्ठा और सेवा आचरण के मानकों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि शेर सिंह अब उत्तराखंड पुलिस का कर्मचारी नहीं है।.भविष्य में यदि वह किसी धरना-प्रदर्शन, राजनीतिक कार्यक्रम या किसी अन्य अवैध गतिविधि में शामिल होता है, तो उसके लिए उत्तराखंड पुलिस किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होगी.

शेर सिंह का आपराधिक इतिहास भी रहा है. वह कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि गैंग से जुड़े भूमि कब्जा मामले में आरोपी है. हरिद्वार के गंगनहर थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 415/2025 की जांच उत्तराखंड एसटीएफ ने की थी. एसटीएफ के अनुसार, गैंग लोगों को डरा-धमकाकर करोड़ों रुपये की जमीनों और पार्किंग ठेकों पर कब्जा करता था. फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए संपत्तियों की अवैध खरीद-बिक्री करता था. जांच में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और भूमि कब्जे जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए थे. आईजी के मुताबिक, इसी मामले में 15 सितंबर 2025 को शेर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. कई महीने जेल में रहने के बाद वह जमानत पर बाहर आया, जबकि विभाग में उसके खिलाफ डिसमिसल (बर्खास्तगी) की कार्रवाई पहले से चल रही थी.

अक्षय प्रह्लाद कोंडे पुलिस अधीक्षक, पिथौरागढ़ उत्तराखंड पुलिस में अनुशासन सर्वोपरि है. विभागीय आचरण और कानून के विरुद्ध कोई भी गतिविधि स्वीकार नहीं की जाएगी. नियमों के उल्लंघन पर कार्मिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी.

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