कर्णप्रयाग में भू-धंसाव : अबतक 48 मकानों में दरारें ; विशेषज्ञों से सर्वे करवाएगी धामी सरकार

प्रदेश इस समय जोशीमठ में निरंतर हो रहे भू-धंसाव का दंश झेल रहा है, सरकार इस आपदा से निपटने की जद्दो-जहद में लगी ही हुई है की दूसरी ओर  कर्णप्रयाग में आ रही दरारों ने लोगों की चिंता बढा दी है, हालांकी कर्णप्रयाग में जोशीमठ जैसी परिस्थिति नहीं है लेकिन यहां कई आवासीय भवनो पर दरारें आईं हैं । अबतक कुल 48 ऐसे भवनों को चिन्हित किया गया है जिनमें बड़ी दरारें हैं ।

क्योंकी जोशीमठ पहले ही इस समस्या से जूझ रहा है इसलिए सरकार कर्णप्रयाग को लेकर सतर्क हो गई है । इसलिए धामी सरकार कर्णप्रयाग में भी भू-गर्भीय सर्वेक्षण करवाने की तैयारी में है ।

बताया जा रहा है की कर्णप्रयाग में जल्द ही आईआईटी रूड़की और भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological survey of india) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने पहुंच सकते हैं ।

चारधाम यात्रा के लिहाज से कर्णप्रयाग अत्यंत महत्वपूर्ण कस्बा है, जोशीमठ को जाने वाला मार्ग भी कर्णप्रयाग से होकर गुजरता है ।

यही कर्णप्रयाग प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण की ओर जाने वाला इकलौता मार्ग है । वहीं गढवाल को कुमाऊं से जोड़ने वाला मार्ग भी कर्णप्रयाग से होकर गुजरता है । यहां से कुमाऊं बॉर्डर महज 60 किलोमीटर की दूरी पर है ।

इसी के साथ पहाड़ों के लिए बन रही ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल मार्ग का अंतिम स्टेशन भी कर्णप्रयाग ही है । आपदा प्रबंधन सचिव डा रंजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार अब पूरे कर्णप्रयाग का आइआइटी से जियो टेक्निकल और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से भू-गर्भीय सर्वेक्षण कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि ‘कर्णप्रयाग के जिस क्षेत्र में भवनों में दरारें आई हैं, उसका आइआइटी रुड़की से जियो टेक्निकल सर्वे कराया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक कर्णप्रयाग में हो रहे भू-धंसाव का कोई एक कारण नहीं है, इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं । लोगों का कहना है की अलकनंदा और पिंडर नदी से हो रहे भू-कटाव से भी घर दरक रहे हैं वहीं कुछ घरों को अतिवृष्टि से भी नुकसान हुआ है ।

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