उत्तराखंड

महिलाओं के विरोध के बाद बदला फैसला , ‘मिनी बार’ पर लगी रोक

घरों पर मिनी बार के आदेश के बाद महिलाओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका प्रदर्शन इतना बढ़ गया है की आबकारी विभाग को अपना यह आदेश वापिस लेना पड़ा। नई आबकारी नीति के तहत सरकार ने घर पर ही 50 लीटर तक की शराब रखने का आदेश जारी किया था। वही कुछ दिनों पूर्व एक व्यक्ति को लाइसेंस भी जारी कर दिया गया था।

नई आबकारी निति के तहत सरकार द्वारा अपने अपने घरों पर मिनी बार(mini bar) खोलने के निर्देशों पर महिलाओं ने कड़ा विरोध जताया है। जिसको देखते हुए आबकारी विभाग(excise department) को इस व्यवस्था पर रोक लगानी पड़ी। घरेलू बार पर विरोध के बाद आबकारी आयुक्त हरिचंद सेमवाल की ओर से रोक के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

बता दें कि इस वर्ष की आबकारी नीति में घरेलू बार लाइसेंस की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत बार लाइसेंस लेने वाले को 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष लाइसेंस फीस के तौर पर आबकारी विभाग को चुकाने होते थे। इसके बाद वह घर में 50 लीटर तक शराब रख सकता था। इनमें भी वर्गीकरण किया था। वहीं पिछले दिनों देहरादून में एक व्यक्ति को घरेलू बार लाइसेंस जारी किया गया था। इसके बाद महिलाओं ने आबकारी विभाग की इस व्यवस्था का विरोध शुरू कर दिया।

इसके तहत नौ लीटर भारत में निर्मित अंग्रेजी शराब, नौ लीटर आयातित शराब(liquor), 18 लीटर वाइन और 15.6 लीटर बीयर रखने की अनुमति दी गई थी। इस व्यवस्था के तहत कुछ शौकीन लोग काफी रूचि भी दिखा रहे थे।

लेकिन, अब घरों पर ही मिनी बार को लेकर कुछ वर्गों और महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध इतना बड़ा कि आबकारी विभाग को इस व्यवस्था पर रोक लगाने का निर्णय लेना पड़ा। जहां बुधवार को रोक के आदेश जारी किए हैं।

फिलहाल इस व्यवस्था पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। वही नियमों के अनुसार राज्य में कोई भी व्यक्ति केवल नौ लीटर शराब का परिवहन कर सकता है। जबकि, घर में भी इससे ज्यादा शराब रखना आबकारी अधिनियम के विरुद्ध है। और अगर कोई इससे ज्यादा शराब(liquor) अपने घरों में रखता है तो उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम में कार्रवाई की जाती है।

मिनी बार को लेकर महिलाओं के प्रदर्शन पर जिस तरह से विभाग को अपना फैसला वापिस लेना पड़ा वही देखना अब यह होगा कि आगे क्या कुछ अलग नियम इस पर लागू होगा होंगे या यह मिनी बार हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।

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