हरिद्वार: वेद-विज्ञान एवं संस्कृति महाकुंभ का उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया उद्घाटन
हरिद्वार गुरुकुल कांगड़ी में तीन दिवसीय वेद-विज्ञान एवं संस्कृति महाकुंभ के उद्घाटन समारोह पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ज्ञान विज्ञान और संस्कृति पर आधारित चिंतन के महाकुंभ की सराहना की।

गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार में 23 से 25 दिसंबर तक आयोजित होने जा रहे वेद विज्ञान एवं संस्कृति महाकुंभ के उद्घाटन समारोह के आयोजन पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान उप राष्ट्रपति ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में आना परम सौभाग्य है। वर्षों से वह इस विश्वविद्यालय का नाम सुनते आ रहे और पहली बार यहां आने का जो उन्हें मौका मिला है तो वह यहां से एक बड़ा संकल्प लेकर जाएँगे।
समारोह में करीब 25 मिनट के भाषण में उपराष्ट्रपति ने ज्ञान विज्ञान और संस्कृति पर आधारित चिंतन के महाकुंभ की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इस महाकुंभ के माध्यम से वेद विज्ञान को सशक्त करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को वेद से अवगत कराया जाएगा जो कि राष्ट्रीय निर्माण के लिए और विश्व के स्थतित्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। नई शिक्षा नीति सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप है, हमारी सांस्कृतिक विरासत का सृजन करने वाली है। साथ ही हर भारतवासी को अपनी संस्कृति और विरासत को लेकर गौरव अनुभव करना चाहिए।
हमारी संस्कृति के विरोध में जो भी है वह राष्ट्रवाद के विरोध में है। हमारे अस्तित्व के विरोध में है, उन पर प्रतिघात होना चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक ज्ञान विज्ञान का एकेडमिक विमर्श और अनुप्रयोग का अनिवार्य अंग बनाने के उद्देश्य से तीन दिवस से जो गोष्टी है वह एक सार्थक प्रयास है।
वेद विज्ञान महाकुंभ का यह पर्व हमें हमारी प्राचीन ज्ञान और विज्ञान के प्रति गर्भ महसूस करने का एक आदित्य अवसर प्रदान करता है। अक्सर देखा जाता है कि हम भूल जाते हैं कि हम कौन हैं थोड़ा अंदर झांकेंगे तो पता लगेगा कि विश्व में हमारा मुकाबला करने वाला और कोई देश नहीं है।
उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ ने छात्राओं को नए लोकसभा भवन का भ्रमण करने के लिए भी आमंत्रित किया। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर सोमदेव शतांशु से कहा कि छात्र-छात्राओं को नई लोकसभा का दर्शन करवाएं, जिससे उन्हें विकसित भारत, बदलते भारत और नए भारत की परिकल्पना से परिचित होने का अवसर मिल सके।
संबोधन के समापन पर उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत न सिर्फ विकसित भारत होगा बल्कि विश्व गुरु की अपनी प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करेगा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता लोकसभा सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने की। इस दौरान अति विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल ले.ज. सेनि गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौजूद रहे।